(ज़रूर पढ़ें अप्रैल फूल की दर्दनाक हक़ीक़त)
मुसलमान दूसरे इलाक़ों में जाकर बस गए और अपने गलों में सलीबें (जिससे लगे कि वह भी ईसाई हैं) डाल कर अपने नाम भी ईसाइयों वाले रख लिये ताकि वह महफूज़ रहें
ईसाइयों को यक़ीन था कि अभी भी कुछ मुसलमान उनके मुल्क में हैं, लिहाज़ा उनहोंने मुसलमानों को बाहर निकालने की यह तर्कीब रखी कि पूरे मुल्क में एलान करो कि 1 अप्रैल को तमाम मुसलमान फलाँ जगह पहुंचें ताकि उनको वहाँ भेज दिया जाए जहाँ वह जाना चाहते हैं
चूँकि अब इस्पेन में अमन क़ाएम हो चुका था तो मुसलमानों को सामने आने में कोई डर महसूस ना हुआ, मार्च के पूरे महीने एलान होते रहे और अलहम्रा के क़रीब ख़ेमे (कैम्प) लगा दिये गए पानी वाले जहाज़ का इन्तेज़ान कर दिया गया
मुसलमानों को हर तरह से यक़ीन दिलाया गया कि अब उनके साथ क़त्ल व ग़ारत नहीं किया जाएगा, लिहाज़ा सारे मुसलमान इकठ्ठा हो गए
यह हाद्सा कोई 500 साल पहले पेश आया था, सारे मुसलमानों को जहाज़ में बिठा कर रवाना कर दिया गया, मुसलमानों को अपना मुल्क छोड़ते हुए रन्ज तो बहुत था मगर ख़ुशी भी थी कि अब उनकी जान पर कोई बात ना आएगी, इधर ईसाई अपने लोगों में जशन मना रहे थे
जहाज़ में बूढ़े, बच्चे, जवान, मर्द व औरतें सभी थे और कई मरीज़ भी, जब यह जहाज़ समन्दर के बीच पहुंचा तो रची हुई साज़िश के तहत पूरे जहाज़ को पानी में डबो दिया गया और वह सारे मुसलमान हमेशा के लिये समन्दर की आग़ोश में सो गए
उसके बाद इस्पेन में ख़ूब ख़ुशियाँ मनाई गईं कि देखो हमने अपने दुश्मनों को कैसे बेवक़ूफ बनाया
फिर यह दिन इस्पेन की सरहदों से निकल कर पूरे यूरोप में फतह का दिन कहलाने लगा और इस दिन को अग्रेज़ी में first April fool का नाम दे दिया गया यानी पहली अप्रैल के बेवक़ूफ
आज भी ईसाई इस दिन को बड़े एहतिमाम से मनाता है और लोगों को झूट बोल कर बेवक़ूफ बनाता है
लोग हमारे मरे थे बजाए इसके कि हम अपने मुसलमान भाइयों, बहनों की मग़्फिरत की और दुश्मनाने दीन की तबाही की दुआ करते अफसोस हम ख़ुद यह दिन मनाने लगे
एै इस पोस्ट को पढ़ने वाले/वाली मेरा सवाल माफी के साथ आपसे है कि अगर आपके घराने के लोगों के साथ एैसा हुआ होता तब भी आप यह दिन एैसे ही मनाते?
फैस्ला आपके हाथ
पोस्ट दिल को बेचैन करे तो आगे बढ़ा कर जितना हो सके मुसलमानों को इससे बचाइये वरना अल्लाह आपको हिदायत की तौफीक़ बख़्शे

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